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शि‌क्षक दिवस


बचपन में कभी पलटे थे पांव
उन स्कूल की गलियों से
फिर वापस आने का इरादा जगाया
रास्तें में मिली उन अनजानी सहेलियों ने
वहीं रुक जाने का मन बनाया
मास्टर जी की उन मजेदार पहेलियों ने।

बातों ही बातों में
कुछ ढंग नए से
हमें सिखला जाते थे वो
अपनी डांट से हमको
अपने काम का एक आइना
अलग ही दिखला जाते थे जो।
हर कदम पर संग रहते वो
अपनी दी हुई सोच के अंदाज़ से
जिसके चलते हम रूबरू होते
नए सफर के हर आगाज़ से।

दिन भर का वक्त
यूं बीत जाता था
वहीं क्लासरूम के उन नजारों में
रम जाता था जिनमें पूरा मन
असल में... वो थे
बढ़कर के एक हजारों में ।

#शिवांगी

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